खेत में खुदाई कै दौरान मां सरस्वती की निकली पुरानी मूर्ति

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केकिन्दड़ा-केकिन्द के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र

में भी पुरानी सामग्री निकल रही है।

जसनगर कस्बे के निकटवर्ती ग्राम केकिन्दड़ा में खेत की मेड़ बंदी के दौरान खुदाई में निकली प्राचीन ऐतिहासिक प्रतिमा ।
ग्राम में मूर्ति निकलने से ग्रामीण है उत्साहित

fast news nagaurखेत में जसनगर कस्बे के साथ आसपास क्षेत्र में लम्बे समय से पुरानी सामग्री निकल रही है, जिससे ये प्रतीत होता है, कि जसनगर क्षैत्र पुराने जमाने में अपनी एक अलग ही पहचान रखता था। इसके उदाहरण घरों, खेतों व अन्य स्थानों की खुदाई के दौरान पत्थर से निर्मित मूर्तिया व अवशेष निकल रहे है । जसनगर में गुप्त काल से प्रतिहार, चौहान, राठौड़ काल की कई धरोहरे है, तथा पुरात्व महत्व की सामग्री मौजूद हैं । जसनगर के दक्षिण दिशा में लूनी नदी के गर्भ में आज भी कई राज दफन है । कई बार इस नदी से प्राचीन देवली, मूर्तियां, शिलालेख आदि सामग्री निकलती है । इसी क्रम में बुधवार को लूनी नदी के दूसरी ओर स्थित केकीन्दड़ा गांव के एक खेत में एक प्राचीन मूर्ति निकली है ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार

जसनगर से मात्र तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित हे गाँव

केकीन्दड़ा गांव के सहदेवराम चांगल अपने खेत में जुताई का कार्य कर रहे थे,

तभी अचानक एक पत्थर निकला जब उसे सीधा किया तो उस पर कई उर्क्कीण विभिन्न मूर्तियां दिखाई दी ।

इस मूर्ति की सूचना पर जसनगर के साहित्य एवं इतिहासकार नरेंद्रसिंह शेखावत ने अवलोकन किया ।

मूर्ति खंडित अवस्था में नवमी सदी की मानी जा रही है मूर्ति में एक देवी वीणा धारण

किए हुए हैं । इस देवी के दोनों और दो महिलाएं चंवर लिए हुए खड़ी हैं,

जो कभी किसी मंदिर का हिस्सा मानी जा रही है।

           

संग्रहालय विभाग वृत अधीक्षक ने बताया

इस मूर्ति के बारे में जयपुर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग वृत अधीक्षक धरमजीत कौर ने बताया कि यह

मूर्ति विद्या की देवी सरस्वती की है । प्रतिहार काल के किसी मंदिर के उदूम्बर भाग रही है ।इस मूर्ति

के आसपास खेतों में प्राचीन सभ्यता के अवशेष के रूप में मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े बिखरे पड़े है ।

साथ ही के केकीन्दड़ा से भूम्बलियां व देवरिया सडक मार्ग की तरफ पहले भी अन्य धातु के नाग,

नागिन सहित पत्थर की मूर्तियां भी निकल चुकी है। इस नदी के किनारे कभी विशाल आबादी

रहने के प्रमाण भी पुराने कुएं के रूप में अवशेष जो कि नदी के मध्य में दबे हुए हैं ।

इसके अलावा लाल मिट्टी की बड़ी ईटे है ,

जिन्हें ग्रामीण भगवान देवनारायण जी के रूप में आस्था प्रकट करते हुए पूजा करते हैं । इस मौके पर

सवाईसिंह राजपुरोहित, सुनिल चांगल, कचरूलाल जागीड़, नथमल खाती,मदनलाल सहित ग्रामीण उपस्थित रहे ।

इनका कहना,,

नरेंद्र सिंह इतिहासकार जसनगर

बीते बीस वर्षो में किसी भी स्थान पर पुराने काल की मूर्तियां, अवशेष, पुरानामहत्व की साम्रगी मिलने। की सूचना

मिलते ही उस जगह पर पहुंचकर इनके बारे में पुरातत्व,पर्यटन,विभाग, राजस्थान धरोधर सरक्षण एवं

प्रन्नोति प्रधिकरण सहित संबंधित विभाग से सूचना लेकर उस अवशेष को संरक्षित करवाना मेरा मुख्य लक्ष्य होता है ।

हमारे खेत में जो यह मूर्ति निकली है। विभाग। द्वारा बताया गया कि यह मूर्ति विद्यादायिनी।

मां सरस्वती की है इस मूर्ति को एक छोटा सा मंदिर बना कर स्थापित कर नियमित रूप से।

पूजा की जाएगी- सहदेव राम चांगल, किसान केकीन्दड़ा

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